Carlo Soriani
नवंबर 1941 की एक रात, बोर्गो सैन लोरेंजो में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले Carlo Soriani ने बस स्टॉप से घर लौटते समय कुत्ते को सड़क के किनारे एक गड्ढे में घायल अवस्था में पाया। यह न जानते हुए कि कुत्ता किसका है, Soriani उसे घर ले आए और उसकी देखभाल कर उसे स्वस्थ किया। Soriani और उनकी पत्नी ने कुत्ते को गोद लेने का फैसला किया और उसका नाम Fido ("वफादार", लैटिन शब्द fidus से) रखा।
